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मन्नतें

आज फिर तेरे दर पर खड़ा मैं मन्नतें हज़ार ले कर लेकिन तुझसे कुछ भी मांग न पाया दी तुने ज़िन्दगी मुझे मुझको तुने इंसान बनाया धरती की गोद में पला बड़ा में तेरी सृष्टि की रक्षा कर न पाया आज फिर तेरे दर पर खड़ा मैं हाथ जोड़े शीश झुकाए क्षमा प्रार्थी हूँ मैं लेकिन तुझसे क्षमा भी मांग न पाया 22-Sep-2012 @ Shirdi