बीती सुबह
कुछ बनने की चाह में मौसम यूँ गुजर गए हम हम रह गए और ज़िन्दगी फ़ना हो गई | ~ . ~ ना सुबह की लालिमा देखी, ना रात की चांदनी मैं जब जागा तो तपती धूप से मेरा सामना हो गया | ~ . ~ हर पल में जीना चाहा हर पल में ना जिया सही और गलत की बंदिशों से जूझते वो लम्हा खो गया | ~ . ~ दौलत की चमक आज घर के कोने कोने में हैं लोग कहते है मुझे मेरी मंज़िल मिल गयी पर वो ये नहीं जानते की मेरा दिल खो गया | ~ . ~