आज़ादी मैं तुझको ढूंढ लाऊंगा
ये जो आज़ादी है वो अभी अधूरी है, पराई है,
इस आज़ादी पर तो शहीदों की भी आंख भर आई है ||
उन्होंने क्रांति की मशाल से देश को आज़ादी दिलाई थी,
सपना था उनका देश को मशाल से रोशन करने का,
हमने तो उस मशाल से देश को आग लगाई है |
ये जो आज़ादी है वो अभी अधूरी है, पराई है,
इस आज़ादी पर तो शहीदों की भी आंख भर आई है ||
वादा है मेरा ऐ आज़ादी मैं तुझको ढूंढ लाऊंगा,
क्रांति की एक मशाल मैं भी जलाऊंगा..
राख कर दूंगा उसमे मैं बुराई और पाप का
नामोनिशान मिटा दूंगा भ्रष्टाचार के दाग का..
चीर के रख दूंगा छाती उसकी जो तुझे विभाजित करेगा
एक युद्ध अंग्रेजो से था अब अन्याय से युद्ध मैं लडूंगा.
न आतंकी राज होगा, न पैसे की माया चलेगी
देश है ये मेरा ये, इसमें शांति और प्यार की गंगा बहेगी..
खेत में किसान के सफलता की फसल लह-लहराएगी
मजदूर जब मेहनत करेगा तो खुशियाँ उसके आँगन आएँगी..
ये जो आज़ादी है वो अभी अधूरी है, पराई है,
इस आज़ादी पर तो शहीदों की भी आंख भर आई है ||
वादा है मेरा ऐ आज़ादी मैं तुझको ढूंढ लाऊंगा,
क्रांति की एक मशाल मैं भी जलाऊंगा
अब तो आज़ादी का जशन मैं तब ही मनाऊंगा...
इस आज़ादी पर तो शहीदों की भी आंख भर आई है ||
उन्होंने क्रांति की मशाल से देश को आज़ादी दिलाई थी,
सपना था उनका देश को मशाल से रोशन करने का,
हमने तो उस मशाल से देश को आग लगाई है |
ये जो आज़ादी है वो अभी अधूरी है, पराई है,
इस आज़ादी पर तो शहीदों की भी आंख भर आई है ||
वादा है मेरा ऐ आज़ादी मैं तुझको ढूंढ लाऊंगा,
क्रांति की एक मशाल मैं भी जलाऊंगा..
राख कर दूंगा उसमे मैं बुराई और पाप का
नामोनिशान मिटा दूंगा भ्रष्टाचार के दाग का..
चीर के रख दूंगा छाती उसकी जो तुझे विभाजित करेगा
एक युद्ध अंग्रेजो से था अब अन्याय से युद्ध मैं लडूंगा.
न आतंकी राज होगा, न पैसे की माया चलेगी
देश है ये मेरा ये, इसमें शांति और प्यार की गंगा बहेगी..
खेत में किसान के सफलता की फसल लह-लहराएगी
मजदूर जब मेहनत करेगा तो खुशियाँ उसके आँगन आएँगी..
ये जो आज़ादी है वो अभी अधूरी है, पराई है,
इस आज़ादी पर तो शहीदों की भी आंख भर आई है ||
वादा है मेरा ऐ आज़ादी मैं तुझको ढूंढ लाऊंगा,
क्रांति की एक मशाल मैं भी जलाऊंगा
अब तो आज़ादी का जशन मैं तब ही मनाऊंगा...
Comments
UMEED KARTE HAIN HAIN KI YEH SAB SIRF KAGZON PE NAA RE JAYE
jai jind!!!!!
jab 'lafz' wahi, anjaane hi aise likhe mil jaaten hain..
toh lafz amar ho jaatein hain.
jab lafz kahen 'ab ladna hai', 'ab aag pe haske chalna hai'.
jab 'lafz' ko koi 'KRISHNA' mile.
Toh woh geeta ban jaatein hain.
Woh lafz amar ho jaaten hain....
God! comment likhte likhte I wrote another poem... Thank you AN***...
Ek baar fir...
umeed se badkar....khoobsurati se jo aazaadi ka vivaran kiya gaya hai...usse yeh sahsa prateethota hai ki tum jeevant udahrano ke saath aazaadi ko paane ki lalak rakhte ho...
Vaiyaktik bhavna ko dekha jaaye to tumhari kavita me bhi ek mashaal hai..jo aaj ke yuva ko samajhna chahiye...
Shubhkaamnayein..
Sachin..
Tumhare hindi bhasha ke gyan par to main kya hi tippani kar sakta hoon. Dhanyawad kar deta hoon.
Rajat