भगवान नहीं दिखता

क्या हो गया है मुझे जो इस दुनिया में मुझे भगवान नहीं दिखता
त्यौहार मनाता हूँ लेकिन पूजता हूँ जिसे वो भगवान नहीं दिखता

घमंड दिखता है, अहम् दिखता है, लालच और लोभ दिखता है
झूठ दिखता है, बुराई दिखती है, क्रोध और काम में डूबा शैतान दिखता है
सच दिखता है, अच्छाई दिखती है, दया और दान करता इंसान दिखता है
क्या हो गया है मुझे जो इस दुनिया में मुझे सब दिखता है पर भगवान नहीं दिखता

कभी धुप से झुलसता, कभी ठण्ड से ठिठुरता,
कही बाढ़ में बहता, कही सूखे का मारा जीवन दिखता है
तम दिखता है, सितम दिखता है, आम इंसान का दर्द दिखता है
भूख से बिलखिलाता बचपन दिखता है, सड़क पर भटकता योवन दिखता है
क्या हो गया है मुझे जो इस दुनिया में मुझे सब दिखता है पर भगवान नहीं दिखता

कहते है की भगवान मन में है लेकिन जब मन देखता हूँ तो....
सब दिखता है, सब दिखता है लेकिन भगवान नहीं दिखता...

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